Wednesday, September 26, 2007

"शब्दों का हेर फेर" एक दर्द

दर्द नही बाटूँ.गा अपना, जिससे दुनियाँ है भरी हुई
मैं बाटूँ दिल का टुकड़ा , दिखे हसीना मुझे कहीं

राम नही बन पाया तो क्या, श्याम बनाऊगा ख़ुद को
सीता जब बची नही जाग मे, राधा संग रास रचाऊगा

नही स्वर्ग की चाह मुझे , धरती पर स्वर्ग बसाऊंगा
और मेनका संग बैठा मैं, प्यार की धूनी रमाऊँगा

कैट रहेगी शाम साथ में, सुस संग रात बिताऊँगा
तनु श्री होगी द्वार पाल , जब यार कहीं मैं जाऊंगा

उसकी पत्नी अपनी होगी, जो यार कर्ण सा दानी होगा
उसका बन जाऊंगा भाई मैं , जो यार दौपड़ी स्वामी होगा

ये था सबदों का हेर फेर , जो सोचोगे दिख जाएगा
गर साफ़ हुआ दिल तो अच्छा, गर पाप हुआ जल जाएगा

गर मेरे दुशशाहस से, कुच्छ सिख लिया तो अच्छा है
जिसने ना देखा मरम है क्या, वो यार अभी भी बच्चा है

1 comment:

  1. बड़े खतरनाक इरादे हैं मियाँ.

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