Friday, November 14, 2008

उपहार !!

लंबा है पथ, खुली सड़्क है,
अपनो का अंबार सज़ा है |
जब तक कुछ दे सकते हो,
बस तब तक संसार खड़ा है |

जब चाहोगे प्यार मिलेगा,
खुशियो का संसार मिलेगा |
जब तक मुठ्ठी बँधी हुई है ,
बस तब तक सम्मान मिलेगा |

इस भीड़- भाड़ की दुनियाँ मे,
अब तुझको भी स्थान मिलेगा |
भरा हुआ है गला जभि तक,
बस तब तक ही दान मिलेगा |

हर शुख सुविधा द्वार खड़ी है,
अब तुझको गले लगाने को |
है जब तक गिरवी रखने को,
बस तब तक उपहार मिलेगा |

पूजा भी फलदायक होगी,
"आनंद" भी वरदान मिलेगा |
जब तक त्याग करोगे तुम,
बस तब तक परिवार मिलेगा |

कुछ देने का प्रण कर लो,
तो तुझको भी संसार मिलेगा |
साथ रहे जो हर शुख दुख मे,
अब ढूँढे से वो यार मिलेगा |

लंबा है पथ, खुली सड़्क है,
अपनो का अंबार सज़ा है |
जब तक कुछ दे सकते हो,
बस तब तक संसार खड़ा है |

4 comments:

  1. जब चाहोगे प्यार मिलेगा,
    खुशियो का संसार मिलेगा |
    जब तक मुठ्ठी बँधी हुई है ,
    बस तब तक सम्मान मिलेगा |

    इस भीड़- भाड़ की दुनियाँ मे,
    अब तुझको भी स्थान मिलेगा |
    भरा हुआ है गला जभि तक,
    बस तब तक ही दान मिलेगा |
    बहुत अच्छा लिखा है।

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  2. बहुत सुन्दर रचना

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  3. Its a Miracles u did with ur pen...Keep it up dude

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