Wednesday, November 25, 2009

अब इंतज़ार किसका है

क्यूँ इंतजार है हमें,
रहनुमा का अब भी |
खून से लतफत,
ये देश हमारा भी है |
कब तलक फिर  दोष,
हम  देते  रहेंगे उनको  |
कीचड़ में सना देश,
आखिर तो हमारा भी है |
अधिकार सिरोधार्य है ,
जब नागरिक है हम |
सर गर्व से ऊँचा हो,
ये कर्त्तव्य हमारा भी है |
माना कि बहुत है यहाँ,
अंतर विचार में पर |
खाईयों को पाटने का,
काम हमारा भी है |
माना कि कमी है यहाँ,
मार्ग दर्शको का पर,
जो हर वक़्त बढ़ रहा है,
वो देश हमारा ही  है |


3 comments:

  1. देश हमारा ही है |

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  2. सही कहा आपने अच्छी लगी यह पंक्तियाँ

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  3. बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
    आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन


    SANJAY KUMAR
    HARYANA
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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