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Monday, February 7, 2011

आज भी भुला नहीं, कॉलेज में पहला दिन तेरा |

आज भी धुंधले सही,
पर याद हैं कुछ रास्ते |
एक वो है जिस पर घर तेरा,
दूजा जहां देखा तुझे |

सोचा कभी सच बोल दूँ,
सब भेद दिल के खोल दूँ |
पर रुक गएँ पग, जम गएँ लभ |
जब सामने देखा तुझे |

वो झुक के चलने कि अदा,
चेहरे पर  बालों कि घटा |
वो डर से सहमा तन बदन,
कैसे मैं भुलूँ वो दास्ताँ |

ऐसा न कि देखा नहीं,
चंचल बदन, मुख चन्द्रमा |
पर आज भी भुला नहीं,
कॉलेज में पहला दिन तेरा |
 

2 comments:

  1. बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
    यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके., हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
    मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

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