जब ख़ौफ़ नही है मरने का, फिर मुद्दा क्या है डरने का |
सब एक साथ ही आ जाओ, यूँ लूक्का-छिप्पि करना क्या ||
यूँ बारी-बारी तड़प-तड़प, कापुरुषों सा अब जीना क्या |
नापाक इरादों के गिरगिट, यूँ रंग बदल अब जीना क्या ||
है जिस्म हमारा भारत से, फिर भारत मे मिल जाएगा |
पर जब ठनका माथा अपना, तू भाग कहाँ फिर जाएगा ||
हम तो बारुदों पर चल कर, यहाँ इस मुकाम पर आए है |
इतनी तेरी औकात ना थी , हम जितना सहते आये है ||
ये ताज नही है फूलों का , जब चाहा इसे पहन लोगे |
गर हुई हिमाकत फिर ऐसी, लाहौर भी तुम तब खो दोगे ||
बाँध सबर का टूट ना जाए, ये दुआ करो अपने रब से |
खोज ना पाओगे खुद को , जब भूले से भी हम सनके ||
भीख के धन पर ऐश करो, ना ऐसे व्यर्थ गावओ तुम |
छोड़ो चिंता अब धर्म-क़ौम की, खुद का घर बनवओ तुम ||
करने को पूरा पाक ध्वस्त, यहाँ एक जवान ही काफ़ी है |
यहाँ करने से पहले कुछ भी, सौ बार सोचकर आना तुम ||
यहाँ लुक-छिप गोलाबारी कर, तुम हमे हिला ना पाओगे |
हमे मिटाने की चाहत मे, खुद मिट्टी मे मिल जाओगे ||
है जिस्म हमारा भारत से, फिर भारत मे मिल जाएगा |
पर जब ठनका माथा अपना, तू भाग कहाँ फिर जाएगा ||
Sunday, November 30, 2008
Tuesday, November 25, 2008
सूखे शब्दकोष
भाव भुला कहीं, रस का अभाव सा,
खो गये रंग भी, और अलंकार भी |
सोच कुंठित हुई, शब्द भी खो गये,
पात्र झूठे लगे, ज़िंदगी के मुझे ,
ज़िंदगी भी मुझे आज झूठी लगी |
शब्द सागर मे एक बूँद बाकी नही,
भाव सागर भी मुझको यू खाली मिली |
जब भी चाहा की कुछ मै नया सा लिखूं,
मुझको हर मोड़ पर फिर उदासी मिली |
सूत्रो मे मैं बँधा ही रहा हर घड़ी,
सोच को भी जहाँ कुछ आज़ादी ना थी |
था मात्रा की गड़ना से आज़ाद मै,
चार चरणो से खुद को बचा ना सका |
भाव भुला कहीं, रस का अभाव सा |
खो गये रंग भी, और अलंकार भी |
खो गये रंग भी, और अलंकार भी |
सोच कुंठित हुई, शब्द भी खो गये,
पात्र झूठे लगे, ज़िंदगी के मुझे ,
ज़िंदगी भी मुझे आज झूठी लगी |
शब्द सागर मे एक बूँद बाकी नही,
भाव सागर भी मुझको यू खाली मिली |
जब भी चाहा की कुछ मै नया सा लिखूं,
मुझको हर मोड़ पर फिर उदासी मिली |
सूत्रो मे मैं बँधा ही रहा हर घड़ी,
सोच को भी जहाँ कुछ आज़ादी ना थी |
था मात्रा की गड़ना से आज़ाद मै,
चार चरणो से खुद को बचा ना सका |
भाव भुला कहीं, रस का अभाव सा |
खो गये रंग भी, और अलंकार भी |
Friday, November 14, 2008
उपहार !!
लंबा है पथ, खुली सड़्क है,
अपनो का अंबार सज़ा है |
जब तक कुछ दे सकते हो,
बस तब तक संसार खड़ा है |
जब चाहोगे प्यार मिलेगा,
खुशियो का संसार मिलेगा |
जब तक मुठ्ठी बँधी हुई है ,
बस तब तक सम्मान मिलेगा |
इस भीड़- भाड़ की दुनियाँ मे,
अब तुझको भी स्थान मिलेगा |
भरा हुआ है गला जभि तक,
बस तब तक ही दान मिलेगा |
हर शुख सुविधा द्वार खड़ी है,
अब तुझको गले लगाने को |
है जब तक गिरवी रखने को,
बस तब तक उपहार मिलेगा |
पूजा भी फलदायक होगी,
"आनंद" भी वरदान मिलेगा |
जब तक त्याग करोगे तुम,
बस तब तक परिवार मिलेगा |
कुछ देने का प्रण कर लो,
तो तुझको भी संसार मिलेगा |
साथ रहे जो हर शुख दुख मे,
अब ढूँढे से वो यार मिलेगा |
लंबा है पथ, खुली सड़्क है,
अपनो का अंबार सज़ा है |
जब तक कुछ दे सकते हो,
बस तब तक संसार खड़ा है |
अपनो का अंबार सज़ा है |
जब तक कुछ दे सकते हो,
बस तब तक संसार खड़ा है |
जब चाहोगे प्यार मिलेगा,
खुशियो का संसार मिलेगा |
जब तक मुठ्ठी बँधी हुई है ,
बस तब तक सम्मान मिलेगा |
इस भीड़- भाड़ की दुनियाँ मे,
अब तुझको भी स्थान मिलेगा |
भरा हुआ है गला जभि तक,
बस तब तक ही दान मिलेगा |
हर शुख सुविधा द्वार खड़ी है,
अब तुझको गले लगाने को |
है जब तक गिरवी रखने को,
बस तब तक उपहार मिलेगा |
पूजा भी फलदायक होगी,
"आनंद" भी वरदान मिलेगा |
जब तक त्याग करोगे तुम,
बस तब तक परिवार मिलेगा |
कुछ देने का प्रण कर लो,
तो तुझको भी संसार मिलेगा |
साथ रहे जो हर शुख दुख मे,
अब ढूँढे से वो यार मिलेगा |
लंबा है पथ, खुली सड़्क है,
अपनो का अंबार सज़ा है |
जब तक कुछ दे सकते हो,
बस तब तक संसार खड़ा है |
Saturday, October 25, 2008
मने ऐसी दिवाली अब !!!

हो सारी बात शुखदायी,
जो बीते ज़िंदगी मे अब |
जलाओ अब दिए ऐसे,
जगमग हो यहाँ हर कण |
ना कोई यार गुम-सूम हो
ना कोई यार हो चुप-चुप |
खुले अब गाँठ सब दिल के,
मने ऐसी दिवाली अब |
ना कोई यार हो भूखा,
ना कोई घर अंधेरा हो |
मिले ऐसे गले अब कि,
फिर रातों मे सबेरा हो |
इस प्यार के बाज़ार मे,
अब मंदी ना हो कोई |
मुनाफ़ा हर जगह फैले,
मने ऐसी दिवाली अब |
आप सभी को मेरी तरफ से हार्दिक शुभ कामनए!!
Tuesday, October 21, 2008
" ऊर्जा "आज का युवा और गिरती राजनीति
ऊर्जा हमी मे है कि हम, ब्राम्हांड का निर्माण कर दें |
और जब भटके कभी तो, विश्व का निर्वाण कर दें |
चाहे तो हमे कर नियंत्रित, उर्जा का भंडार कर लो |
या तो घट जाए ग़लत कुछ, इससे पहले ही निकल लो |
हम भी काँटों से बने है, ना समझ हमे फूल रौंदो |
नासूर बन जाए यहाँ ,तुम इससे पहले ही सुधर लो |
छोटे से ढेले है, ना मसलो , चूर हम हो जाएँगे |
पर उड़ के आँखो मे गये तो, आँख ही ले जाएँगे |
बन के तमासाई ,ना अब तमाशा यार देखो |
गर मदारी हम बने, बंदर हमारे यार तुम हो |
है अनियंत्रित कण, हम जब निकले तो टकराएँगे |
अपनी तो हस्ती नही कुछ,तुझको मिटा कर जाएँगे |
रोक लो आँधी, और बहने दो हवा कुछ मंद |
खुशबू हो चारो तरफ, और फैला हो आनंद |
Friday, October 17, 2008
१२०२७ रन बनाने के लिए सचिन "रिकॉर्ड " तेंदुलकर को हार्दिक बधाई !!!!
Thursday, October 9, 2008
मैं बचपन मे कितना सच्चा था |

यूँ घुट घुट कर जीने से,
मेरा मर जाना अच्च्छा था |
क्यूँ पंख कतर कर छोड़ दिया,
इससे अच्छा वो पिंजरा था |
छलक रहा हूँ इधर उधर,
इससे अच्छा मै सूखा था |
यों कमर पर चढ़ इतराने से,
मैं कच्चा घट ही अच्छा था |
जल मग्न हुई इस दुनिया मे,
मेरा सुखापन अच्छा था. |
मरु बनकर उड़ता मरूभूमि मे,
मै खो जाता तो अच्छा था |
अर्ध नग्न हुई इस दुनियाँ मे,
मै पूरा नंगा ही अच्छा था |
यौवन के ज्वलन उजाले से
मेरा अंधेरा बचपन अच्छा था |
मुझे याद हैं वो बातें सारी
मैं बचपन मे कितना सच्चा था |
Wednesday, October 8, 2008
Tuesday, October 7, 2008
सब भाव कहीं पर छूट गये |
सुख गयी स्याही सारी,
कागज के पन्ने भींग गये |
जब दिल ने चाहा लिखना,
सब भाव कहीं पर छूट गये |
सोचा छन्दो का बंधन हो,
दोहों का भी अभिनंदन हो |
पर मेरे रचनाओं से,
रस, अलंकार तक रूठ गये |
अब रिस्तो की गाँठो मे भी,
पहले जैसा भाव नही,
मुझको गले लगाने को,
अब कोई भी तैयार नही |
है हर शब्दों मे व्यंग भरा,
अब जो मुझसे टकराती है |
बात करू किससे दिल की,
जब अपने ही कतराते हैं |
सुख गयी स्याही सारी,
कागज के पन्ने भींग गये |
जब दिल ने चाहा लिखना,
सब भाव कहीं पर छूट गये |
Tuesday, September 30, 2008
राम राज का स्वप्न
है राजनीति का जो स्तर,फिर एकदिन ऐसा आएगा |
दौलत के बिस्तर के उपर, बिकता पकड़ा जाएगा |
राज उसी का चला करेगा, जिसके हांत मे लट्ठ होगा |
अब जो सच का साथी होगा, वो पीटता पाया जाएगा |
जिसके हांतो सत्ता होगी, फिर सबको वही सताएगा,
और पाँच वर्ष का प्रेम भाव, दंगो से तोड़ा जाएगा |
काम उसीका हुआ करेगा, जो कुछ भेंट चढ़ाएगा |
उसका होगा अल्ला मालिक वो रूल नियम मे जाएगा |
रंग तिरंगे का अब जब, मज़हब मे बँट जाएगा |
केसरिया मे हिंदू होगा, हरे मे मुल्ला आएगा |
जिसके तन पर होगा सफेद, वो भ्रस्टाचार बढ़ाएगा |
और अशोक का चक्र यहाँ, षडयंत्रों से घिर जाएगा |
जो होगा मुखिया अपना, उसे चाभी से चलना होगा |
लघु शंका जाने से पहले, उसे सबका मत लेना होगा |
अब आरच्छन का दानव, हर मानव पर हावी होगा |
जाति पाती का फ़र्क यहाँ, अब जनमत पर भारी होगा |
अब जनता का राज कोष, प्रतिनिधियों पर खाली होगा |
सत्य अहिंसा का प्रतिक, अब भारत मे गाली होगा |
राम राज का स्वप्न यहाँ अब हर चुनाव दिखलाएगा |
जो राम बनेगा इस चुनाव मे, पाँच साल तक खाएगा |
राम ईसा रहमान यहाँ , अब यार चुनावी मुद्दे होंगे |
शांति दूतो के नाम पर अब, हर रोज यहाँ दंगे होंगे |
शायद कहने से आनंद के, फ़र्क यहाँ कुछ पड़ पाता |
तो खुद से आँख मिलाने मे,अपना भारत ना शरमाता |
दौलत के बिस्तर के उपर, बिकता पकड़ा जाएगा |
राज उसी का चला करेगा, जिसके हांत मे लट्ठ होगा |
अब जो सच का साथी होगा, वो पीटता पाया जाएगा |
जिसके हांतो सत्ता होगी, फिर सबको वही सताएगा,
और पाँच वर्ष का प्रेम भाव, दंगो से तोड़ा जाएगा |
काम उसीका हुआ करेगा, जो कुछ भेंट चढ़ाएगा |
उसका होगा अल्ला मालिक वो रूल नियम मे जाएगा |
रंग तिरंगे का अब जब, मज़हब मे बँट जाएगा |
केसरिया मे हिंदू होगा, हरे मे मुल्ला आएगा |
जिसके तन पर होगा सफेद, वो भ्रस्टाचार बढ़ाएगा |
और अशोक का चक्र यहाँ, षडयंत्रों से घिर जाएगा |
जो होगा मुखिया अपना, उसे चाभी से चलना होगा |
लघु शंका जाने से पहले, उसे सबका मत लेना होगा |
अब आरच्छन का दानव, हर मानव पर हावी होगा |
जाति पाती का फ़र्क यहाँ, अब जनमत पर भारी होगा |
अब जनता का राज कोष, प्रतिनिधियों पर खाली होगा |
सत्य अहिंसा का प्रतिक, अब भारत मे गाली होगा |
राम राज का स्वप्न यहाँ अब हर चुनाव दिखलाएगा |
जो राम बनेगा इस चुनाव मे, पाँच साल तक खाएगा |
राम ईसा रहमान यहाँ , अब यार चुनावी मुद्दे होंगे |
शांति दूतो के नाम पर अब, हर रोज यहाँ दंगे होंगे |
शायद कहने से आनंद के, फ़र्क यहाँ कुछ पड़ पाता |
तो खुद से आँख मिलाने मे,अपना भारत ना शरमाता |
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