Sunday, January 11, 2009

कुछ बंदीसे

दिल के हर अहसास को,
हम काश कह पाते |
उमड़े हुए हर भाव को,
कागज पर लिख पाते ||

बहुत कुछ दिल मे है मेरे,
जो ऐसे कह नही सकता |
बड़ी मुस्किल है बिन बोले भी,
मैं अब रह नही सकता ||

मगर कुछ बंदीसे ऐसी है,
जो मुझे भी रोकती है |
अगर अपनी पर आजाए,
तो सरहद चीज़ क्या है ||

4 comments:

  1. आपका सहयोग चाहूँगा कि मेरे नये ब्लाग के बारे में आपके मित्र भी जाने,

    ब्लागिंग या अंतरजाल तकनीक से सम्बंधित कोई प्रश्न है अवश्य अवगत करायें
    तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

    ReplyDelete
  2. बहुत ही सुंदर लाईनें हैं.
    बहुत ही सुंदर और खुबसूरत रचना है
    आपकी. नव वर्ष की शुभकामनायें.
    नया साल आपको शुभ हो, मंगलमय हो.

    ReplyDelete